अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च |
नित्य: सर्वगत: स्थाणुरचलोऽयं सनातन: ||

The soul is unbreakable and insoluble, and can be neither burned nor dried. He is everlasting, all-pervading, unchangeable, immovable and eternally the same.

Bhagvad Gita|| 2.24||

YASH JAGDHARI

~ A Beautiful Passage of Life ~

29 Oct, 1968 - 18 Jan, 2021

Yash landed in this world on the bright morning of 29th October 1968 to enliven and beautify so many lives including mine.

His energy always shined like a beacon of positivity and his persona exuded deep warmth. One can never forget his eyes dancing with mischief and the corners of his eye crinkling up when he laughed, which he did often.

His witty one-liners were sure to crack up the ones who knew him well and fox the new entrants whom he loved to baffle. He was the perfect gentleman. Ever graceful and thoughtful of others, he had the rare ability to see the other side of the coin very well. His capacity to always see the silver lining in every situation, effervescent sprit and his never say never attitude is stuff legends are made of. He often used to say his attitude towards life was inspired by his blood group (B+) BE POSITIVE.

He was a foodie to core. He always maintained you never really travelled well until you savored every food specialty there was to try in that destination. In his own words, he lived to eat and relishing good food was akin to attaining nirvana.

He always knew what he wanted from life and chased it with enviable focus and conviction. That’s how he found me, his soulmate. He loved to recall that moment when he saw me across the room and asked Ally, “who is that girl in yellow?” When Ally asked him why he responded “she is my soulmate and I am going to marry her!” Ally laughed and said boy you don’t even know her name to which he responded “that’s the only thing I don’t know about her.“

He loved his “band of brothers” as he called them, his brothers-in-law, Manu and Shailesh, deeply. He was extremely close to his elder sister, Vanita didi. They were each other’s rocks. His special relationship with Deepu, his sis-in-law was remarkable. Zaina was his little princess, his special slice of heaven as he called her. She changed his life forever, made him stop and smell the flowers so to say. Aryaman was his pride and joy, someone he confessed he learnt from too. He was his son, his buddy and his confidant. Yash was Yaaron da Yaar, Laale de Jaan, Burfi, Jaanu and Methai Lal and much more to his buddies. He always found love and joy in his deep connect with his huge list of friends.

He had and has and will always have, so much love to give that it cannot be espoused in a life time.

A very dear friend wrote this for me the night Yashu told me, “Till we meet again………

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Vanita (didi)- wrote on January 20, 2022 at 6:08 pm:
Finally put it in the right form- how to delete the repeats?
Finally put it in the right form- how to delete the repeats?
Vanita (didi)- wrote on January 20, 2022 at 6:07 pm:
याद कैसे करें उसकी जिसे कभी भूलें ही न हो जन्म भर का जो साथ था वह कैसे छूट गया? अब तक जिसे अपनी परछाई समझ, मुड़ कर देखा भी न था प्यारा सा भाई एक आजन्म हकीकत से ख्वाब बन कर कैसे टूट गया? बब्बी, यश, बब्बी दादा, बब्बी द डब्बी, बब्बू गोशा, बब्स, बाबूषा, बब्बी मामा – ये सब नाम अब सिर्फ गूंजते है कानों में आंखों के सामने तैरती है हजारों झलकीयां- "अब मैं आपके सामने 'प्रसारित' करने जा रहा हूं…" Class 4, KV Indore की स्टेज पर एक अतिथि को "अब कुछ मत लाना – तुम भी मत आना" वो भोला भाव – दो साल का बब्बी घर की होली के हुड़दंग से घबराता हुआ – मैने क्यों नहीं बढ़कर उसे बचाया? शायद मम्मी का उसके प्रति अत्याधिक प्यार को देखकर, एक ईर्ष्याग्रस्त दीदी थी मैं। तीन साल के फर्क में पूना से नीमच जाना अपने दादी बाबा के साथ ट्रेन से जाना अब तक याद है मुझे बाबा ने उन पीली चेनो का झूला बना कर बैठाया था ऊपर, और जब महीने भर बाद मम्मी पापा आए तब मैं उनके पास जा तक नहीं रही थी… पूरे बचपन का साथ – खेल खिलौने, कहानी किताबें, मम्मी पापा का प्यार दुलार और 'मार' भी सभी कुछ तो संग संग था हर बार की राखी, भाई दूज और साथ मनाया जन्मदिन भी अब तक नहीं है हिम्मत उन तस्वीरों को देखने की और देख कर यह समझने की – कि अब वह साथ नहीं है हमारे फिर एक निखरा व्यक्तित्व – दिल्ली यूनिवर्सिटी का Stephanian, FMS का होनहार, हमेशा First class first आने वाला एक आदर्श बेटा/भाई/पति/पिता और दोस्त सभी किरदारों को बखूबी निभाने वाला ऐसा उभर कर आया भाई की शादी के वीडियो दिखाकर अनुराधा से मिलवाया उसका सफर जो मुझसे अलग चला मथुरा कानपुर चंडीगढ़… Read more
याद कैसे करें उसकी जिसे कभी भूलें ही न हो जन्म भर का जो साथ था वह कैसे छूट गया? अब तक जिसे अपनी परछाई समझ, मुड़ कर देखा भी न था प्यारा सा भाई एक आजन्म हकीकत से ख्वाब बन कर कैसे टूट गया? बब्बी, यश, बब्बी दादा, बब्बी द डब्बी, बब्बू गोशा, बब्स, बाबूषा, बब्बी मामा – ये सब नाम अब सिर्फ गूंजते है कानों में आंखों के सामने तैरती है हजारों झलकीयां- "अब मैं आपके सामने 'प्रसारित' करने जा रहा हूं…" Class 4, KV Indore की स्टेज पर एक अतिथि को "अब कुछ मत लाना – तुम भी मत आना" वो भोला भाव – दो साल का बब्बी घर की होली के हुड़दंग से घबराता हुआ – मैने क्यों नहीं बढ़कर उसे बचाया? शायद मम्मी का उसके प्रति अत्याधिक प्यार को देखकर, एक ईर्ष्याग्रस्त दीदी थी मैं। तीन साल के फर्क में पूना से नीमच जाना अपने दादी बाबा के साथ ट्रेन से जाना अब तक याद है मुझे बाबा ने उन पीली चेनो का झूला बना कर बैठाया था ऊपर, और जब महीने भर बाद मम्मी पापा आए तब मैं उनके पास जा तक नहीं रही थी… पूरे बचपन का साथ – खेल खिलौने, कहानी किताबें, मम्मी पापा का प्यार दुलार और 'मार' भी सभी कुछ तो संग संग था हर बार की राखी, भाई दूज और साथ मनाया जन्मदिन भी अब तक नहीं है हिम्मत उन तस्वीरों को देखने की और देख कर यह समझने की – कि अब वह साथ नहीं है हमारे फिर एक निखरा व्यक्तित्व – दिल्ली यूनिवर्सिटी का Stephanian, FMS का होनहार, हमेशा First class first आने वाला एक आदर्श बेटा/भाई/पति/पिता और दोस्त सभी किरदारों को बखूबी निभाने वाला ऐसा उभर कर आया भाई की शादी के वीडियो दिखाकर अनुराधा से मिलवाया उसका सफर जो मुझसे अलग चला मथुरा कानपुर चंडीगढ़ मुंबई दिल्ली से होकर गुड़गांव तक अपने प्यारे से छोटे परिवार के साथ टूना फिर अर्णव का पहले बना प्यारा सा चंदा मामा उनको सबसे ज्यादा चाहने वाला और सभी का सबसे बड़ा सलाहकार, यारों का यार आर्यमन का पहले फिर ज़ायना का पापा बना अपने जीजू का भी था वो तरफदार अस्पताल में पापा के कहने पर एक जगह नौकरी ठुकराई ऐसा आज्ञाकारी बेटा जिस पर था सभी को नाज़ जब भगवान को हुआ मंजूर कि मां रहते हुए भी हमसे हुई दूर पूरे 3 महीने रातों की ड्यूटी करके अपने ऊपर आए जनवरी 21 के स्ट्रोक का बताया भी नहीं बरसों का मनमुटाव मिटाकर 52 की उम्र में चला ही गया जिंदगी के आखरी साल विवशता पूर्ण सिर्फ फोन पर ही दिया साथ करोना की दूरियों ने फिर कभी मिलने तक नहीं दिया अपनी सेहत का न किया पूरा ध्यान मानो जानता था कि नही बचेगी उसकी जान अचानक से जो हम सबसे इतना असमय बिछड़ गया सभी करीबियों को क्यो ऐसे बिलखता कर गया शायद ईश्वर को बहुत जरूरत थी उसकी जो हमारी जिंदगी में मौजूद एक फरिश्ते को यूं बुला लिया – अपने पास। Love you always❤️❤️❤️❤️
Vanita (didi) wrote on January 20, 2022 at 6:04 pm:
Trying to fit it as a poem- Tribute to my brother Yash Jagdhari/ Bubby❤️ Love you always- याद कैसे करें उसकी जिसे कभी भूलें ही न हो जन्म भर का जो साथ था वह कैसे छूट गया? अब तक जिसे अपनी परछाई समझ, मुड़ कर देखा भी न था प्यारा सा भाई एक आजन्म हकीकत से ख्वाब बन कर कैसे टूट गया? बब्बी, यश, बब्बी दादा, बब्बी द डब्बी, बब्बू गोशा, बब्स, बाबूषा, बब्बी मामा – ये सब नाम अब सिर्फ गूंजते है कानों में आंखों के सामने तैरती है हजारों झलकीयां- "अब मैं आपके सामने 'प्रसारित' करने जा रहा हूं…" Class 4, KV Indore की स्टेज पर एक अतिथि को "अब कुछ मत लाना – तुम भी मत आना" वो भोला भाव – दो साल का बब्बी घर की होली के हुड़दंग से घबराता हुआ – मैने क्यों नहीं बढ़कर उसे बचाया? शायद मम्मी का उसके प्रति अत्याधिक प्यार को देखकर, एक ईर्ष्याग्रस्त दीदी थी मैं। तीन साल के फर्क में पूना से नीमच जाना अपने दादी बाबा के साथ ट्रेन से जाना अब तक याद है मुझे बाबा ने उन पीली चेनो का झूला बना कर बैठाया था ऊपर, और जब महीने भर बाद मम्मी पापा आए तब मैं उनके पास जा तक नहीं रही थी… पूरे बचपन का साथ – खेल खिलौने, कहानी किताबें, मम्मी पापा का प्यार दुलार और 'मार' भी सभी कुछ तो संग संग था हर बार की राखी, भाई दूज और साथ मनाया जन्मदिन भी अब तक नहीं है हिम्मत उन तस्वीरों को देखने की और देख कर यह समझने की – कि अब वह साथ नहीं है हमारे फिर एक निखरा व्यक्तित्व – दिल्ली यूनिवर्सिटी का Stephanian, FMS का होनहार, हमेशा First class first आने वाला एक आदर्श बेटा/भाई/पति/पिता और दोस्त सभी किरदारों को बखूबी निभाने वाला ऐसा उभर कर आया भाई… Read more
Trying to fit it as a poem- Tribute to my brother Yash Jagdhari/ Bubby❤️ Love you always- याद कैसे करें उसकी जिसे कभी भूलें ही न हो जन्म भर का जो साथ था वह कैसे छूट गया? अब तक जिसे अपनी परछाई समझ, मुड़ कर देखा भी न था प्यारा सा भाई एक आजन्म हकीकत से ख्वाब बन कर कैसे टूट गया? बब्बी, यश, बब्बी दादा, बब्बी द डब्बी, बब्बू गोशा, बब्स, बाबूषा, बब्बी मामा – ये सब नाम अब सिर्फ गूंजते है कानों में आंखों के सामने तैरती है हजारों झलकीयां- "अब मैं आपके सामने 'प्रसारित' करने जा रहा हूं…" Class 4, KV Indore की स्टेज पर एक अतिथि को "अब कुछ मत लाना – तुम भी मत आना" वो भोला भाव – दो साल का बब्बी घर की होली के हुड़दंग से घबराता हुआ – मैने क्यों नहीं बढ़कर उसे बचाया? शायद मम्मी का उसके प्रति अत्याधिक प्यार को देखकर, एक ईर्ष्याग्रस्त दीदी थी मैं। तीन साल के फर्क में पूना से नीमच जाना अपने दादी बाबा के साथ ट्रेन से जाना अब तक याद है मुझे बाबा ने उन पीली चेनो का झूला बना कर बैठाया था ऊपर, और जब महीने भर बाद मम्मी पापा आए तब मैं उनके पास जा तक नहीं रही थी… पूरे बचपन का साथ – खेल खिलौने, कहानी किताबें, मम्मी पापा का प्यार दुलार और 'मार' भी सभी कुछ तो संग संग था हर बार की राखी, भाई दूज और साथ मनाया जन्मदिन भी अब तक नहीं है हिम्मत उन तस्वीरों को देखने की और देख कर यह समझने की – कि अब वह साथ नहीं है हमारे फिर एक निखरा व्यक्तित्व – दिल्ली यूनिवर्सिटी का Stephanian, FMS का होनहार, हमेशा First class first आने वाला एक आदर्श बेटा/भाई/पति/पिता और दोस्त सभी किरदारों को बखूबी निभाने वाला ऐसा उभर कर आया भाई की शादी के वीडियो दिखाकर अनुराधा से मिलवाया उसका सफर जो मुझसे अलग चला मथुरा कानपुर चंडीगढ़ मुंबई दिल्ली से होकर गुड़गांव तक अपने प्यारे से छोटे परिवार के साथ टूना फिर अर्णव का पहले बना प्यारा सा चंदा मामा उनको सबसे ज्यादा चाहने वाला और सभी का सबसे बड़ा सलाहकार, यारों का यार आर्यमन का पहले फिर ज़ायना का पापा बना अपने जीजू का भी था वो तरफदार अस्पताल में पापा के कहने पर एक जगह नौकरी ठुकराई ऐसा आज्ञाकारी बेटा जिस पर था सभी को नाज़ जब भगवान को हुआ मंजूर कि मां रहते हुए भी हमसे हुई दूर पूरे 3 महीने रातों की ड्यूटी करके अपने ऊपर आए जनवरी 21 के स्ट्रोक का बताया भी नहीं बरसों का मनमुटाव मिटाकर 52 की उम्र में चला ही गया जिंदगी के आखरी साल विवशता पूर्ण सिर्फ फोन पर ही दिया साथ करोना की दूरियों ने फिर कभी मिलने तक नहीं दिया अपनी सेहत का न किया पूरा ध्यान मानो जानता था कि नही बचेगी उसकी जान अचानक से जो हम सबसे इतना असमय बिछड़ गया सभी करीबियों को क्यो ऐसे बिलखता कर गया शायद ईश्वर को बहुत जरूरत थी उसकी जो हमारी जिंदगी में मौजूद एक फरिश्ते को यूं बुला लिया – अपने पास।
Vanita (didi) wrote on January 20, 2022 at 5:59 pm:
A tribute to my brother.. याद कैसे करें उसकी जिसे कभी भूलें ही न हो जन्म भर का जो साथ था वह कैसे छूट गया? अब तक जिसे अपनी परछाई समझ, मुड़ कर देखा भी न था प्यारा सा भाई एक आजन्म हकीकत से ख्वाब बन कर कैसे टूट गया? बब्बी, यश, बब्बी दादा, बब्बी द डब्बी, बब्बू गोशा, बब्स, बाबूषा, बब्बी मामा – ये सब नाम अब सिर्फ गूंजते है कानों में आंखों के सामने तैरती है हजारों झलकीयां- "अब मैं आपके सामने 'प्रसारित' करने जा रहा हूं…" Class 4, KV Indore की स्टेज पर एक अतिथि को "अब कुछ मत लाना – तुम भी मत आना" वो भोला भाव – दो साल का बब्बी घर की होली के हुड़दंग से घबराता हुआ – मैने क्यों नहीं बढ़कर उसे बचाया? शायद मम्मी का उसके प्रति अत्याधिक प्यार को देखकर, एक ईर्ष्याग्रस्त दीदी थी मैं। तीन साल के फर्क में पूना से नीमच जाना अपने दादी बाबा के साथ ट्रेन से जाना अब तक याद है मुझे बाबा ने उन पीली चेनो का झूला बना कर बैठाया था ऊपर, और जब महीने भर बाद मम्मी पापा आए तब मैं उनके पास जा तक नहीं रही थी… पूरे बचपन का साथ – खेल खिलौने, कहानी किताबें, मम्मी पापा का प्यार दुलार और 'मार' भी सभी कुछ तो संग संग था हर बार की राखी, भाई दूज और साथ मनाया जन्मदिन भी अब तक नहीं है हिम्मत उन तस्वीरों को देखने की और देख कर यह समझने की – कि अब वह साथ नहीं है हमारे फिर एक निखरा व्यक्तित्व – दिल्ली यूनिवर्सिटी का Stephanian, FMS का होनहार, हमेशा First class first आने वाला एक आदर्श बेटा/भाई/पति/पिता और दोस्त सभी किरदारों को बखूबी निभाने वाला ऐसा उभर कर आया भाई की शादी के वीडियो दिखाकर अनुराधा से मिलवाया उसका सफर जो मुझसे… Read more
A tribute to my brother.. याद कैसे करें उसकी जिसे कभी भूलें ही न हो जन्म भर का जो साथ था वह कैसे छूट गया? अब तक जिसे अपनी परछाई समझ, मुड़ कर देखा भी न था प्यारा सा भाई एक आजन्म हकीकत से ख्वाब बन कर कैसे टूट गया? बब्बी, यश, बब्बी दादा, बब्बी द डब्बी, बब्बू गोशा, बब्स, बाबूषा, बब्बी मामा – ये सब नाम अब सिर्फ गूंजते है कानों में आंखों के सामने तैरती है हजारों झलकीयां- "अब मैं आपके सामने 'प्रसारित' करने जा रहा हूं…" Class 4, KV Indore की स्टेज पर एक अतिथि को "अब कुछ मत लाना – तुम भी मत आना" वो भोला भाव – दो साल का बब्बी घर की होली के हुड़दंग से घबराता हुआ – मैने क्यों नहीं बढ़कर उसे बचाया? शायद मम्मी का उसके प्रति अत्याधिक प्यार को देखकर, एक ईर्ष्याग्रस्त दीदी थी मैं। तीन साल के फर्क में पूना से नीमच जाना अपने दादी बाबा के साथ ट्रेन से जाना अब तक याद है मुझे बाबा ने उन पीली चेनो का झूला बना कर बैठाया था ऊपर, और जब महीने भर बाद मम्मी पापा आए तब मैं उनके पास जा तक नहीं रही थी… पूरे बचपन का साथ – खेल खिलौने, कहानी किताबें, मम्मी पापा का प्यार दुलार और 'मार' भी सभी कुछ तो संग संग था हर बार की राखी, भाई दूज और साथ मनाया जन्मदिन भी अब तक नहीं है हिम्मत उन तस्वीरों को देखने की और देख कर यह समझने की – कि अब वह साथ नहीं है हमारे फिर एक निखरा व्यक्तित्व – दिल्ली यूनिवर्सिटी का Stephanian, FMS का होनहार, हमेशा First class first आने वाला एक आदर्श बेटा/भाई/पति/पिता और दोस्त सभी किरदारों को बखूबी निभाने वाला ऐसा उभर कर आया भाई की शादी के वीडियो दिखाकर अनुराधा से मिलवाया उसका सफर जो मुझसे अलग चला मथुरा कानपुर चंडीगढ़ मुंबई दिल्ली से होकर गुड़गांव तक अपने प्यारे से छोटे परिवार के साथ टूना फिर अर्णव का पहले बना प्यारा सा चंदा मामा उनको सबसे ज्यादा चाहने वाला और सभी का सबसे बड़ा सलाहकार, यारों का यार आर्यमन का पहले फिर ज़ायना का पापा बना अपने जीजू का भी था वो तरफदार अस्पताल में पापा के कहने पर एक जगह नौकरी ठुकराई ऐसा आज्ञाकारी बेटा जिस पर था सभी को नाज़ जब भगवान को हुआ मंजूर कि मां रहते हुए भी हमसे हुई दूर पूरे 3 महीने रातों की ड्यूटी करके अपने ऊपर आए जनवरी 21 के स्ट्रोक का बताया भी नहीं बरसों का मनमुटाव मिटाकर 52 की उम्र में चला ही गया जिंदगी के आखरी साल विवशता पूर्ण सिर्फ फोन पर ही दिया साथ करोना की दूरियों ने फिर कभी मिलने तक नहीं दिया अपनी सेहत का न किया पूरा ध्यान मानो जानता था कि नही बचेगी उसकी जान अचानक से जो हम सबसे इतना असमय बिछड़ गया सभी करीबियों को क्यो ऐसे बिलखता कर गया शायद ईश्वर को बहुत जरूरत थी उसकी जो हमारी जिंदगी में मौजूद एक फरिश्ते को यूं बुला लिया – अपने पास।
Nipun wrote on January 19, 2022 at 7:25 am:
Dear Anu,Aryaman and Zaina. Loads of love and hugs. Yashji and his presence made one feel so comfortable and at ease.His infectious warm smile could melt anyone's heart. Precious memories and cherished moments. Prayers ….always.
Dear Anu,Aryaman and Zaina. Loads of love and hugs. Yashji and his presence made one feel so comfortable and at ease.His infectious warm smile could melt anyone's heart. Precious memories and cherished moments. Prayers ….always.
Ritu Nagra wrote on January 19, 2022 at 2:32 am:
Dearest Anu, you, Aryaman & Zaina are on my mind today on the anniversary of Yash's passing. Sending you all love & hugs 💞 Love leaves beautiful memories to cherish for a lifetime. I will always cherish & remember fondly the time spent with you all in 2019. Stay strong Anu ❤
Dearest Anu, you, Aryaman & Zaina are on my mind today on the anniversary of Yash's passing. Sending you all love & hugs 💞 Love leaves beautiful memories to cherish for a lifetime. I will always cherish & remember fondly the time spent with you all in 2019. Stay strong Anu ❤
Vani wrote on January 18, 2022 at 3:58 pm:
I have such a clear memory of the first time I met Yash. For once he was not experimenting with colours he loved and wore pristine white. Handsome guy with most beautiful smile and their was no looking back there after. Our 10 days of goa honeymoon gift came with free gift of Yash Anu and trust me when they left after 5 odd days I told Ally I am getting bored😂. There was no looking back after that. My love for toor Dal was his giving giving. For me to go back to his home and not hear him say tweety and not get a warm hug from him is something I am running away from for I am scared of this closure. Until we meet again Yash all I want to say is you will always be loved and you will always be a very important part of our life and Ally misses you a lot…. Love u TC( Tom cruise)
I have such a clear memory of the first time I met Yash. For once he was not experimenting with colours he loved and wore pristine white. Handsome guy with most beautiful smile and their was no looking back there after. Our 10 days of goa honeymoon gift came with free gift of Yash Anu and trust me when they left after 5 odd days I told Ally I am getting bored😂. There was no looking back after that. My love for toor Dal was his giving giving. For me to go back to his home and not hear him say tweety and not get a warm hug from him is something I am running away from for I am scared of this closure. Until we meet again Yash all I want to say is you will always be loved and you will always be a very important part of our life and Ally misses you a lot…. Love u TC( Tom cruise)
Vanita- wrote on January 18, 2022 at 1:29 pm:
I8/1/2022- याद कैसे करें उसकी जिसे कभी भूलें ही न हो जन्म भर का जो साथ था वह कैसे छूट गया? अब तक जिसे अपनी परछाई समझ, मुड़ कर देखा भी न था प्यारा सा भाई एक आजन्म हकीकत से ख्वाब बन कर कैसे टूट गया? बब्बी, यश, बब्बी दादा, बब्बी द डब्बी, बब्बू गोशा, बब्स, बाबूषा, बब्बी मामा – ये सब नाम अब सिर्फ गूंजते है कानों में आंखों के सामने तैरती है हजारों झलकीयां- "अब मैं आपके सामने 'प्रसारित' करने जा रहा हूं…" Class 4, KV Indore की स्टेज पर एक अतिथि को "अब कुछ मत लाना – तुम भी मत आना" वो भोला भाव – दो साल का बब्बी घर की होली के हुड़दंग से घबराता हुआ – मैने क्यों नहीं बढ़कर उसे बचाया? शायद मम्मी का उसके प्रति अत्याधिक प्यार को देखकर, एक ईर्ष्याग्रस्त दीदी थी मैं। तीन साल के फर्क में पूना से नीमच जाना अपने दादी बाबा के साथ ट्रेन से जाना अब तक याद है मुझे बाबा ने उन पीली चेनो का झूला बना कर बैठाया था ऊपर, और जब महीने भर बाद मम्मी पापा आए तब मैं उनके पास जा तक नहीं रही थी… पूरे बचपन का साथ – खेल खिलौने, कहानी किताबें, मम्मी पापा का प्यार दुलार और 'मार' भी सभी कुछ तो संग संग था हर बार की राखी, भाई दूज और साथ मनाया जन्मदिन भी अब तक नहीं है हिम्मत उन तस्वीरों को देखने की और देख कर यह समझने की – कि अब वह साथ नहीं है हमारे फिर एक निखरा व्यक्तित्व – दिल्ली यूनिवर्सिटी का Stephanian, FMS का होनहार, हमेशा First class first आने वाला एक आदर्श बेटा/भाई/पति/पिता और दोस्त सभी किरदारों को बखूबी निभाने वाला ऐसा उभर कर आया भाई की शादी के वीडियो दिखाकर अनुराधा से मिलवाया उसका सफर जो मुझसे अलग चला मथुरा कानपुर… Read more
I8/1/2022- याद कैसे करें उसकी जिसे कभी भूलें ही न हो जन्म भर का जो साथ था वह कैसे छूट गया? अब तक जिसे अपनी परछाई समझ, मुड़ कर देखा भी न था प्यारा सा भाई एक आजन्म हकीकत से ख्वाब बन कर कैसे टूट गया? बब्बी, यश, बब्बी दादा, बब्बी द डब्बी, बब्बू गोशा, बब्स, बाबूषा, बब्बी मामा – ये सब नाम अब सिर्फ गूंजते है कानों में आंखों के सामने तैरती है हजारों झलकीयां- "अब मैं आपके सामने 'प्रसारित' करने जा रहा हूं…" Class 4, KV Indore की स्टेज पर एक अतिथि को "अब कुछ मत लाना – तुम भी मत आना" वो भोला भाव – दो साल का बब्बी घर की होली के हुड़दंग से घबराता हुआ – मैने क्यों नहीं बढ़कर उसे बचाया? शायद मम्मी का उसके प्रति अत्याधिक प्यार को देखकर, एक ईर्ष्याग्रस्त दीदी थी मैं। तीन साल के फर्क में पूना से नीमच जाना अपने दादी बाबा के साथ ट्रेन से जाना अब तक याद है मुझे बाबा ने उन पीली चेनो का झूला बना कर बैठाया था ऊपर, और जब महीने भर बाद मम्मी पापा आए तब मैं उनके पास जा तक नहीं रही थी… पूरे बचपन का साथ – खेल खिलौने, कहानी किताबें, मम्मी पापा का प्यार दुलार और 'मार' भी सभी कुछ तो संग संग था हर बार की राखी, भाई दूज और साथ मनाया जन्मदिन भी अब तक नहीं है हिम्मत उन तस्वीरों को देखने की और देख कर यह समझने की – कि अब वह साथ नहीं है हमारे फिर एक निखरा व्यक्तित्व – दिल्ली यूनिवर्सिटी का Stephanian, FMS का होनहार, हमेशा First class first आने वाला एक आदर्श बेटा/भाई/पति/पिता और दोस्त सभी किरदारों को बखूबी निभाने वाला ऐसा उभर कर आया भाई की शादी के वीडियो दिखाकर अनुराधा से मिलवाया उसका सफर जो मुझसे अलग चला मथुरा कानपुर चंडीगढ़ मुंबई दिल्ली से होकर गुड़गांव तक अपने प्यारे से छोटे परिवार के साथ टूना फिर अर्णव का पहले बना प्यारा सा चंदा मामा उनको सबसे ज्यादा चाहने वाला और सभी का सबसे बड़ा सलाहकार, यारों का यार आर्यमन का पहले फिर ज़ायना का पापा बना अपने जीजू का भी था वो तरफदार अस्पताल में पापा के कहने पर एक जगह नौकरी ठुकराई ऐसा आज्ञाकारी बेटा जिस पर था सभी को नाज़ जब भगवान को हुआ मंजूर कि मां रहते हुए भी हमसे हुई दूर पूरे 3 महीने रातों की ड्यूटी करके अपने ऊपर आए जनवरी 21 के स्ट्रोक का बताया भी नहीं बरसों का मनमुटाव मिटाकर 52 की उम्र में चला ही गया जिंदगी के आखरी साल विवशता पूर्ण सिर्फ फोन पर ही दिया साथ करोना की दूरियों ने फिर कभी मिलने तक नहीं दिया अपनी सेहत का न किया पूरा ध्यान मानो जानता था कि नही बचेगी उसकी जान अचानक से जो हम सबसे इतना असमय बिछड़ गया सभी करीबियों को क्यो ऐसे बिलखता कर गया शायद ईश्वर को बहुत जरूरत थी उसकी जो हमारी जिंदगी में मौजूद एक फरिश्ते को यूं बुला लिया – अपने पास।
Anuradha Jegdhari wrote on January 18, 2022 at 1:09 pm:
दर्द को भी प्यार हो चला है हमसे बड़ी गहरी ये आशनाई है । दबे पाँव आकर सिरहाने बैठ जाता है चुपके चुपके से मेरे बाल सहलाता है । अनसोई आँखों में कुछ ख़्वाब बसाना चाहता है मेरी तन्हाई में वो कुछ गुनगुना चाहता है । मेरी ख़ामोशियाँ अब उसे तकलीफदेह लगतीं हैं मेरा अकेलान अब उसके दिल में चुभता है । दर्द को भी प्यार हो चला है हमसे ताउम्र साथ रहने की उसने भी कसम खाई है ।
दर्द को भी प्यार हो चला है हमसे बड़ी गहरी ये आशनाई है । दबे पाँव आकर सिरहाने बैठ जाता है चुपके चुपके से मेरे बाल सहलाता है । अनसोई आँखों में कुछ ख़्वाब बसाना चाहता है मेरी तन्हाई में वो कुछ गुनगुना चाहता है । मेरी ख़ामोशियाँ अब उसे तकलीफदेह लगतीं हैं मेरा अकेलान अब उसके दिल में चुभता है । दर्द को भी प्यार हो चला है हमसे ताउम्र साथ रहने की उसने भी कसम खाई है ।
Naveen Atrishi wrote on December 8, 2021 at 2:56 pm:
Yash was my classmate and a very good friend in KV. Today, a couple of school mates were at my place and we remembered our school days. Yash name came up as he was the most handsome and intelligent boy in our class. After my friends left I thought of connecting with Yash and started googling his name. This website came up and I dont have words here to display my feelings. Deeply hurt and condolences to the grieving family. During our school days, early 80s, my home was right next to the bus stop where he used to wait for his sister. Frequently he came to my home for having water. My parents were also very fond of him and always used to praise him. He left KV and joined SP vidyalay and I have never met him after that. But he was a very good friend and I still cherish those memories.
Yash was my classmate and a very good friend in KV. Today, a couple of school mates were at my place and we remembered our school days. Yash name came up as he was the most handsome and intelligent boy in our class. After my friends left I thought of connecting with Yash and started googling his name. This website came up and I dont have words here to display my feelings. Deeply hurt and condolences to the grieving family. During our school days, early 80s, my home was right next to the bus stop where he used to wait for his sister. Frequently he came to my home for having water. My parents were also very fond of him and always used to praise him. He left KV and joined SP vidyalay and I have never met him after that. But he was a very good friend and I still cherish those memories.